जोड़ प्रतिस्थापन सर्जरी , जिसे रिप्लेसमेंट आर्थ्रोप्लास्टी भी कहा जाता है, एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें खराब जोड़ की सतह को ऑर्थोपेडिक प्रोस्थेसिस से बदल दिया जाता है। कई लोग जोड़ों के पुराने दर्द से राहत पाने और जोड़ों की गतिशीलता में सुधार करने के लिए जोड़ की सर्जरी करवाते हैं , जब गैर-सर्जिकल तरीके कारगर नहीं होते हैं।
जोड़ों के प्रतिस्थापन सर्जरी से जुड़ी कई भ्रांतियां हैं जो काफी समय से अप्रचलित हो चुकी हैं। आइए कुछ आम भ्रांतियों और उनसे जुड़े तथ्यों पर एक नजर डालते हैं।
सामग्री:
मिथक 1: मैं जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी नहीं करवा सकता क्योंकि मैं बहुत छोटा/बहुत बूढ़ा हूँ।
मिथक 2: रिप्लेसमेंट जॉइंट्स लंबे समय तक नहीं चलते।
मिथक 3: जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी कराने का मतलब है हफ्तों तक अस्पताल में रहना।
मिथक 4: चूंकि यह एक सर्जरी है, इसलिए जीवन भर के निशानों के लिए तैयार रहें!
मिथक 5: जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी बेहद दर्दनाक होती है।
मिथक 6: जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी के बाद आप खेल नहीं खेल सकते।
मिथक 7: जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी केवल गठिया से पीड़ित लोगों के लिए है।
मिथक 8: जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी के बाद ठीक होने की अवधि बहुत लंबी होती है।
मिथक 9: जोड़ों को ठीक कराने का एकमात्र तरीका सर्जरी है।
मिथक 10: अगर आप अस्पताल जाएंगे तो आपको सर्जरी करवाने के लिए राजी कर लिया जाएगा।

मिथक 1: मैं जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी नहीं करवा सकता क्योंकि मैं बहुत छोटा/बहुत बूढ़ा हूँ।
तथ्य: आजकल, अस्थि शल्य चिकित्सक किसी मरीज की जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए उसकी उपयुक्तता निर्धारित करने के मानदंड के रूप में उम्र को नहीं मानते हैं। कूल्हे या घुटने के प्रतिस्थापन सर्जरी का निर्णय मरीज द्वारा अनुभव किए जा रहे दर्द और विकलांगता के स्तर पर निर्भर करता है।

मिथक 2: रिप्लेसमेंट जॉइंट्स लंबे समय तक नहीं चलते।
तथ्य: दशकों पहले तक यह बात सच थी, लेकिन अब नहीं। समय, तकनीक और शोध के साथ यह सच्चाई बदल गई है। अब, प्रतिस्थापन जोड़ कम से कम 25 वर्षों तक चलते हैं, और शायद जीवन भर भी। आपकी विकलांगता के आधार पर, इस बात की अच्छी संभावना है कि सर्जरी पूरी होने के बाद आपको कभी भी दोबारा जांच कराने की आवश्यकता न पड़े।
मिथक 3: जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी कराने का मतलब है हफ्तों तक अस्पताल में रहना।
तथ्य: यह मिथक बहुत पुराना है। तब से चिकित्सा क्षेत्र में बहुत प्रगति हुई है। पहले सर्जरी के बाद 10-15 दिन अस्पताल में रहना सामान्य बात थी, लेकिन आज औसत अवधि घटकर 3-4 दिन रह गई है।
मिथक 4: चूंकि यह एक सर्जरी है, इसलिए जीवन भर के निशानों के लिए तैयार रहें!
तथ्य: पहले जब सर्जरी खुली और आक्रामक होती थी, तब निशान पड़ना एक आम समस्या थी। अब सर्जरी न्यूनतम आक्रामक होती हैं , इसलिए निशान पड़ने की संभावना बहुत कम है। अगर सर्जरी के बाद कोई निशान रह भी जाता है, तो वह समय के साथ आसानी से मिट जाता है।
मिथक 5: जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी बेहद दर्दनाक होती है।
तथ्य: वैसे तो हर सर्जरी दर्दनाक होती है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि आपको इसका अनुभव नहीं होगा। सर्जन आमतौर पर सर्जरी शुरू करने से पहले मरीज को एनेस्थीसिया देते हैं। इस तरह सर्जरी सोते समय पूरी हो जाती है और इसलिए आपको किसी भी तरह का दर्द महसूस नहीं होता।
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मिथक 6: जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी के बाद आप खेल नहीं खेल सकते।
तथ्य: मैराथन और जॉगिंग जैसी कुछ ऐसी एक्सरसाइज हैं जिनकी आपको अनुमति नहीं होगी, लेकिन अगर आप गोल्फ, टेबल टेनिस, तैराकी, साइकिल चलाना, पैदल चलना आदि जैसे कम प्रभाव वाले खेल खेलते हैं तो कोई समस्या नहीं है।
मिथक 7: जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी केवल गठिया से पीड़ित लोगों के लिए है।
तथ्य: हालांकि जोड़ों का प्रतिस्थापन शल्य चिकित्सा गठिया से पीड़ित लोगों के लिए उपयोगी है, लेकिन यह सर्जरी केवल इसी बीमारी के लिए नहीं है। किसी भी व्यक्ति, चाहे वह वृद्ध हो या युवा, को इसकी आवश्यकता हो सकती है यदि उसे रोजमर्रा के कार्यों को करने में कठिनाई होती है और प्रतिदिन असहनीय दर्द का अनुभव होता है।
मिथक 8: जोड़ों के प्रतिस्थापन की सर्जरी के बाद ठीक होने की अवधि बहुत लंबी होती है।
तथ्य: घुटने या कूल्हे के पूर्ण प्रतिस्थापन की सर्जरी होने पर भी आप सर्जरी वाले दिन ही खड़े हो सकते हैं। हालांकि आपको किसी भी प्रकार की गतिविधि में जल्दबाजी न करने की सलाह दी जाती है, लेकिन आप कुछ ही हफ्तों में पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे।
मिथक 9: जोड़ों को ठीक कराने का एकमात्र तरीका सर्जरी है।
तथ्य: जोड़ बदलने की सर्जरी अक्सर तब अंतिम विकल्प होती है जब गैर-सर्जिकल तरीके कारगर नहीं होते। यदि आपकी समस्या गंभीर नहीं है और दवाओं से ठीक हो सकती है, तो आपको सर्जरी की आवश्यकता भी नहीं पड़ सकती है।
मिथक 10: अगर आप अस्पताल जाएंगे तो आपको सर्जरी करवाने के लिए राजी कर लिया जाएगा।
तथ्य: डॉक्टर मरीज के हित में सबसे बेहतर जानते हैं। हीलिंग हॉस्पिटल में , हमारे अत्यंत अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन तब तक सर्जरी की सलाह नहीं देते जब तक कि यह बिल्कुल आवश्यक न हो। आपसे पहले आपके मेडिकल इतिहास के बारे में पूछा जाएगा और फिर शारीरिक परीक्षण, जांच या एक्स-रे किया जाएगा।
रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर यह तय करेंगे कि आपकी जोड़ों की चोट तीव्र है या दीर्घकालिक। यदि यह केवल तीव्र चोट है, तो आपको केवल दवाइयाँ और फिजियोथेरेपी दी जाएगी । यदि समस्या दीर्घकालिक है, तो आप सर्जन से अपने विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं और अंततः अपने लिए सर्वोत्तम उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
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